On Page SEO क्या है बेसिक से लेकर Advance On Page SEO तक सारी जानकारी

On Page SEO In Hindi

पिछली एक पोस्ट में हमने चर्चा की थी “seo क्या होता है” के बारे में तब हमने जाना के सामान्य रूप से seo दो प्रकार से होता है, पहला है ऑन पेज seo (On page Seo), दूसरा है ऑफ पेज seo (Off Page Seo), इस पोस्ट में हम ऑन पेज seo के बारे में गहराई से जानेंगे और समझेंगे ऑन पेज seo क्या है, इसे कैसे करते हैं। इस पोस्ट में बेसिक seo से एडवांस seo तक आसान भाषा में समझाया गया है।

ऑन पेज seo (On Page Seo)

ऑन पेज seo वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से हम अपनी वेबसाइट के प्रत्येक पेज को सर्च इंजन के अनुकूल बनाते हैं ताकि सर्च इंजन के वेब रोबोट आसानी से पेज को समझ सकें और हमें serp (Search Engine Result Page) पर अच्छी रैंक मिलने में मदद हो सके।

ऑन पेज seo(On Page Seo) कैसे करना है इसकी सारी प्रक्रिया नीचे दी गई है। ऑन पेज seo पर बहुत ज्यादा ध्यान केंद्रित करने से पहले जान लें की आपका seo तब तक आम नहीं आ सकता जब तक आप आपने यूजर्स को खुश नहीं रखते, क्योंकि यूजर्स आपकी वेबसाइट पर तभी आंएगे जब उनको आपकी वेबसाइट पर कुछ मूल्यवान जानकारी मिलेगी। इसका मतलब यह है की seo और आपकी वेबसाइट की गुणवत्ता दोनो परस पर निर्भर हैं। इसलिए आप यूजर्स को ज्यादा प्राथमिकता दें साथ ही seo का भी ध्यान रखें।

ऑन पेज seo के कुछ बेसिक स्टेप हैं जिन्हैं आपको क्रमशः पूरा करना है।

टॉप लेवल डोमेन (Top Level Domain)

ऑन पेज seo का सबसे पहला कदम है कीवर्ड के साथ टॉप लेवल डोमेन (.com .net .org .gov) होना चाहिए। उदाहरण. यदि आपकी वेबसाइट मोबाइल से संबंधित है तो आपके डोमेन नेम में मोबाइल शब्द होना चाहिए जैसे yourwordmobile.com आदि। (यह बहुत बेसिक बात है पर में सलाह दूँगा जितना संभव हो .com डोमेन ही खरीदें क्योंकि यह बहुत लोकप्रिय है पर यदि आपने पहले से कोई और डोमेन खरीद लिया है तो आप अपने वर्तमान डोमेन नेम के साथ रह सकते है इसमें कोई समस्या नहीं है )

मेटा टैग (Meta Tag)

मेटा टैग में वेब पेज से संबंधित जानकारी होती है, यह यूजर्स के काम की जानकारी नहीं होती पर यह सर्च इंजन के काम की होती है।
इसी जानकारी को पढ़कर सर्च इंजन को यह पता चलता है की वेब पेज किस विषय से संबंधित है।
मेटा टैग में कीवर्ड, ऑथर, डिस्क्रिप्शन, जैसी जानकारी होती है जो सर्च इंजन के काम की होती है इसलिए मेटा टैग अच्छी तरह से डालना जरूरी होता है। मेटा टैग में वेब पेज से संबंधित कीवर्ड और डिस्क्रिप्शन होना चाहिए

मेटा टैग वेब पेज के head टैग के अंदर लिखे जाते हैं। जैसे की आप नीचे देख सकते हैं। यदि आपकी वेबसाइट वर्डप्रेस आधारित है तो आप Yoast SEO प्लगइन इन्सटॉल कर सकते हैं जिसकी सहायता से आप अपनी इच्छा अनुसार मेटा टैग डाल सकते हैं।
यदि आपकी वेबसाइट ब्लॉगर आधारित है तो आप नीचे दी गई सेटिंग को चालू करके अपनी पोस्ट पर मेटा डिस्क्रिप्शन डाल सकते हैं।

Enable meta description box in Blogger

ऊपर बताई गई सेटिंग को चालू करने के बाद आप ब्लॉगर में पोस्ट लिखते समय दांए तरफ Post Setting पेनल में पोस्ट के संबंध में डिस्क्रिप्शन डाल सकते हैं।

Blog post Description Section

Keywords, author, वाले टैग डालने के लिए आपको आपकी टेम्पलेट (Template) को एडिट (Edit) करना पड़ेगा फिर आप अपनी इच्छा अनुसार keyword, author, के टैग डाल सकते हैं।

<head>

  <meta charset=”UTF-8″>

  <meta name=”description” content=”Latest Mobiles and Computers”>

  <meta name=”keywords” content=”Mobile, Computer, Tablet”>

  <meta name=”author” content=”Your Name”>

  <meta name=”viewport” content=”width=device-width, initial-scale=1.0″>

</head>

(नोट – गूगल ने कीवर्ड टैग को पढ़ना बंद कर दिया है पर कुछ सर्च इंजन अब भी कीवर्ड टैग पर निर्भर हैं इसलिए आप चाहें तो मैट कीवर्ड वाली लाइन शामिल कर सकते हैं )

कीवर्ड रिसर्च (Keyword Research)

कोई भी लेख/पोस्ट लिखने से पहले सबसे पहला काम होता है कीवर्ड रिसर्च करें और खोजे गये कीवर्ड को सही जगह शामिल करें। इस विषय पर मैंने एक पोस्ट अलग से लिखा है जहां पर कीवर्ड रिसर्च कैसे करें से संबंधित जानकारी विस्तार से दी गई हैं आप पढ़ सकते हैं।

कीवर्ड घनत्व (Keyword Density)

कीवर्ड घनत्व का मतलब है की किसी पेज/पोस्ट में कोई कीवर्ड कितनी बार दोहराया गया है इसे कीवर्ड घनत्व कहते हैं। कुछ एक्सपर्ट का मानना है कि किसी पेज में कीवर्ड घनत्व 1 से 3 प्रतिशत तक होना चाहिए।

उदा. मान लीजिए आपने मोबाइल के संदर्भ में एक लेख लिखा जिसमें 100 शब्द हैं। तो अच्छे ऑन पेज seo के लिए आपके लेख में मोबाइल शब्द 2 से 3 बार आना चाहिए । इसलिए जब भी आप अपनी वेबसाइट पर कोई पोस्ट लिखते हैं तो उसमें कीवर्ड घनत्व का बहुत ध्यान रखें।

एक जरूरी बात, आपकी पोस्ट के पहले पैराग्राफ के 150 शब्दों में आपका कीवर्ड एक बार जरूर होना चाहिए। इस सबसे पहले आपको यह भी पता होना चाहिए कीवर्ड रिसर्च कैसे करना है।

पोस्ट का टाइटल-Title Of The Post

On Page SEO में यदि कोई चीज सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है तो वह है पोस्ट का शीर्षक (Title)।
क्योंकि शीर्षक को पढ़कर ही व्यक्ति आगे की योजना बनाता है की उसे वह पोस्ट पढ़नी चाहिए या नहीं, यदि आपका शीर्षक बहुत आकर्षक और यूजर के अनुसार है तो वह आपकी पोस्ट पर जरूर क्लिक करेगा और पढ़ना चाहेगा। पर यदि आपके शीर्षक में वो शब्द नहीं हैं जो यूजर को चाहिए तो वह आपकी पोस्ट पर शायद क्लिक ना करे।

शायद आप सोच रहे हों की आखिर शीर्षक कैसे On Page Seo पर प्रभाव डाल सकता है।
आप सही सोच रहे हैं, शीर्षक सीधे तौर पर SEO पर प्रभाव नहीं डालता पर पोस्ट का शीर्षक CTR को जरूर प्रभावित करता है। और CTR On Page SEO का बहुत बड़ा रैंकिग फैक्टर है।

CTR क्या है ? यह On Page SEO को कैसे प्रभावित करता है।

CTR का पूरा नाम Click Through Rate है। यानी यह वह रेट है जिस रेट से यूजर आपकी पोस्ट पर क्लिक कर रहे हैं।आइए इसे उदाहरण के साथ समझते हैं।
मान लीजिए आपने समोसा बनाने के संबंध में एक पोस्ट लिखा। और 100 लोगों ने समोसा बनाने के बारे में सर्च किया और आपकी पोस्ट सर्च इंजन रिजल्ट पेज पर प्रत्येक बार दिखाई गई यानी 100 बार दिखाई गई पर उन 100 व्यक्तियों में से केवल 30 लोगों ने ही आपकी पोस्ट पर क्लिक किया तो आपका CTR 0.3 (30/100) होगा। लेकिन आम तौर पर हम इस दर को प्रतिशत में मापते हैं तो इस दर में 100 का गुणा भी करेंगे तो आपका CTR होगा 30%
(30/100*100)

CTR = Total Number of Clicks / Total Number of Impression * 100

गूगल उन पोस्ट / टाइटल को ज्यादा ऊपर रैंक देता है जिनका ज्यादा CTR हो, तो यह हमारे लिए एक संकेत है की आप अपने टाइटल को एसा लिखें कि यूजर आपके टाइटल को पढ़ते ही आपकी पोस्ट पर क्लिक कर दे।

किसी निश्चित कीवर्ड के सर्च किए जाने पर यदि किसी खास रिजल्ट को ज्यादा क्लिक मिलें तो इसका सीधा सिगनल गूगल के पास जाता है जो गूगल को यह बताता है की इस निश्चित कीवर्ड के लिए यह खास रिजल्ट सर्वश्रेष्ठ रहेगा

इमेज ऑल्ट टैग (Image Alt Tag)

जब भी हम कोई इमेज वेब पेज पर डालते हैं तो उसमें ऑल्ट टैग जरूर डालना चाहिए क्योंकि यह यूजर्स और सर्च इंजन दोनों के लिए सहायक होता है। सर्च इंजन को ऑल्ट टैग से इमेज के बारे में पता चलता है। और यूज़र के लिए यह तब काम आता है जब इमेज लोड नहीं हो पाती है तो यूज़र को इमेज की जगह ऑल्ट टैग दिखता है। यह तब भी काम आता है जब धीमे इंटरनेट की वजह से इमेज लोड नहीं हो पाती है। साथ ही इसका ऑन पेज seo में भी बहुत महत्व है।

वर्डप्रैस और ब्लॉगर में आपको इमेज का ऑल्ट टैग डालने की सुविधा होती है पर यदि आप अपने आप से डालनाचाहते हैं तो कोड नीचे दिया गया है।

<img src=”http://www.example.com/wp-content/uploads/2014/10/your-image.jpg”

alt=”alternate text for image” width=”300″ height=”199″ title=”A proper title attribute” />

URL की संरचना (Structure Of URL)

आपके URL की संरचना एसी होनी चाहिए जिसे पढ़कर कोई भी आसानी से समझ जाए की पोस्ट/पेज किस बारे में है। और URL में कीवर्ड को सम्मलित जरूर करें।
उदा. मान लीजिए आपने मोबाइल के बारे में एक पोस्ट लिखा है तो उस पोस्ट के URL में मोबाइल कीवर्ड जरूर होना चाहिए।
http://www.yoursite.com/latest-mobile.html यह url seo के लिहाज से बिल्कुल सही है।
http://www.yoursite.com/xhs5$%[email protected] यह url seo के लिहाज से उचित नहीं है।
(वर्डप्रेस में url की संरचना का चुनाव करने के लिए सेटिंग के अंदर परमालिंक (Permalink) का फीचर दिया गया है ताकि आप आसानी यूज़र फ्रेन्डली url structure को चुन सकें।

wordpress permalink
Permalink

इंटरनल लिंकिंग (Internal Linking)

जब आप अपनी वेबसाइट के एक पेज को दूसरे पेज से लिंक (link) करते हैं तो उसे इंटरनल लिंकिंग कहते हैं। जब भी आप कोई पोस्ट लिखते हैं तो उस पोस्ट को उससे संबंधित पोस्ट से जरूर लिंक करें क्योंकि इससे हो सकता है यूज़र को उन (संबंधित पोस्ट) पोस्ट में रुचि हो। और यूज़र उन्हें पढ़ना चाहता हो।

उदा. मान लीजिए आपने मोबाइल से संबंधित कोई पोस्ट लिखा है। और आपके पास लैपटॉप से संबंधित पोस्ट पहले से है तो आप दोनों पोस्ट (मोबाइल वाली तथा लैपटॉप वाली) को आपस में लिंक कर दें ताकि मोबाइल का पेज देखने आए यूज़र को यदि लैपटॉप में रुचि हो तो वह डारेक्ट मोबाइल वाले पेज से ही लैपटॉप वाले पेज पर जा सके। जैसे मैंने इस पेज को ऑफ पेज seo (Off Page SEO) वाली पोस्ट से लिंक किया है। इंटरनल लिंकिंग के दो मुख्य फायदे हैं।

1. आपको अधिक पेज व्यू मिल सकते हैं।
2. यह आपकी वेबसाइट के seo को उन्नत करता है।

नोट-उस पोस्ट को लिंक करें जिसे आप रैंक करना चाहते हैं। इससे होगा यह की आपकी उस पोस्ट (लिंक की गई पोस्ट) की अथॉर्टी (Authority) बढ़ जाएगी जिससे आपकी पोस्ट को रैंक होने में सहायता मिलेगी।

एंकर टेक्स्ट (Anchor Text)

इंटरनल लिंकिंग करते समय एंकर टेक्स्ट का जरूर ध्यान रखें । एंकर टेक्स्ट वह टेक्स्ट होता है जिसपर क्लिक करके हम किसी दूसरे पेज जाते हैं। या एंकर टेक्स्ट वह टेक्स्ट होता है जिसके पीछे कोई लिंक छुपी होता है।

जैसे – यह पोस्ट ऑन पेज SEO (On Page SEO) के बारे में है परंतु मैंने इसे ऑफ पेज SEO (Off Page SEO) से भी लिंक किया है ताकि विजिटर चाहे तो उस पोस्ट पर यहीं से सके। और ध्यान देने वाली बात, मैंने एंकर टेक्स्ट के तौर पर “ऑफ पेज SEO” शब्द को चुना है ताकि सर्च इंजन को पता चल सके की इस पोस्ट से लिंक किया गया पेज/पोस्ट किस विषय से संबंधित है। HTML कोड में एंकर टेक्स्ट इस तरह दिखता है।

<a href=”www.website.com/linked-page.html”> this is Anchor Text </a>

 

उचित फॉरमेटिंग (Proper Formatting)

ऑन पेज seo का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है पेज की फॉरमेटिंग, क्योंकि पेज कि फॉरमेटिंग से ही पता चलता है कि पेज में कितनी हैडिंग हैं और कितनी सब हैडिंग हैं और कितने महत्वपूर्ण कीवर्ड है जिन्हें आपने हाईलाइट किया है। इसलिए पोस्ट लिखते समय पेज की फॉरमेटिंग का पूरा ध्यान रखें। html में हैडिंग को महत्व के आधार पर h1 से h6 तक 6 भागों में बाँटा गया है। इसलिए ध्यान रहे पेज की सबसे महत्वपूर्ण हैडिंग h1 टैग में होनी चाहिए। और पेज के महत्वपूर्ण शब्दों को बोल्ड के माध्यम से हाईलाइट जरूर करें ताकि यूज़र का ध्यान बना रहे।
कुछ ध्यान देने योग्य बातें

  • उचित फ़ॉन्ट का चुनाव (जिन्हें आसानी से पढ़ा जा सके)
  • उचित फ़ॉन्ट साइज होना ( ताकि आसानी से पढ़ा जा सके)
  • उचित हेडिंग (Heading) और सब-हेडिंग (Subheading) होनी चाहिए (ताकि यूजर को पैराग्राफ का सार समझने में आसानी हो)
  • पोस्ट में स्पेलिंग सही होना ( ताकि यूज़र और गूगल को पोस्ट का कंटेंट(Content) समझने में दिक्कत ना हो)
  • मुख्य शब्दों को बोल्ड करें ताकि उन शब्दों पर उचित ध्यान दिया जा सके
  • पोस्ट की ग्रामर सही होना चाहिए

(सब-हेडिंग का प्रयोग जरूर करें क्योंकि इससे यूजर को लेख समझने में आसानी होती है। साथ ही यूजर किसी हिस्से को पढ़ना चाहता है या नहीं इसका वह आसानी से निर्णय कर सकता है।)

छोटे पैराग्राफ का उपयोग करें

किसी भी विषय के संबंध में लिखते समय पैराग्राफ का ध्यान रखें की वो ज्यादा बड़े ना हों। क्योंकि अधिक लंबे पैराग्राफ को पढ़ने से व्यक्ति ऊब (bore) ने लगता है।

छोटे वाक्य का उपयोग करें

पोस्ट लिखते समय छोटे-छोटे वाक्यों का अधिक उपयोग करें बजाय बड़े वाक्यों का। क्योंकि बड़े वाक्यों को समझना थोड़ा मुश्किल होता है। (यह बिन्दु पाठकों के लिए सहायक हो सकता है।)

अंत में कम शब्दों के साथ पोस्ट का निष्कर्ष (Conclusion) जरूर लिखें

साइट मेप (Sitemap)

साइट मेप वेबसाइट का मेप यानि नक्शा होता है। जिसमें वेबसाइट के सभी पेजों कि सूची होती है। साइट मेप दो तरह के हो सकते हैं।
एक यूजर के लिए और दूसरा सर्च इंजन के लिए, यूजर वाला साइट मेप यूजर को वेबसाइट की संरचना के बारे में जानकारी देता है की कौन सा पेज कहाँ पर है। और दूसरा साइट मेप सर्च इंजन के लिए होता है जो हर वेबसाइट के लिए बहुत जरूरी होता है। यह साइट मेप सर्च इंजन को वेबसाइट के हर पेज के बारे में पूरी जानकारी देता है ताकि सर्च इंजन के क्रॉलर (Crawler) वेबसाइट को अच्छे तरीके से क्रॉल कर सकें। इसलिए हर वेबसाइट के मालिक को यह जरूरी हो जाता है की वह अपना साइट मैप सर्च इंजन को सबमिट करे।

sitemap
Sitemap

रेस्पॉन्सिव डिज़ाइन (Responsive Design)

आपकी वेबसाइट रेस्पॉन्सिव डिज़ाइन वाली होनी चाहिए। रेस्पॉन्सिव डिज़ाइन से मतलब है की आपकी वेबसाइट हर डिवाइस पर आसानी से खुल जाए और डिवाइज की स्क्रीन के मुताबिक अपने आप को बदल ले इसे कहते हैं वेबसाइट का रिस्पॉन्सिव होना । यदि आपकी वेबसाइट रेस्पॉन्सिव है तो यह SEO के लिए अच्छी बात साबित हो सकती है। ज्यादातर वेबसाइट कम्प्यूटर के हिसाब से बनाइ जाती हैं। पर आजकल मोबाइल का अधिक उपयोग होने कि वजह से इन्हें मोबाइल फ्रेंडली(Mobile Friendly) भी बनाया जाता है ताकि मोबाइल पर भी आसानी से खोला जा सके। आपकी वेबसाइट मोबाइल फ्रेंडली है या नहीं यह जानने के लिए यहाँ क्लिक करें।

Responsivve Web Design
Responsivve Web Design

ब्लॉग कमेंट (Blog Comments)

जानकारी के लिए बताना चाहता हूँ की आपकी ब्लॉग-पोस्ट पर की गईं कमेंट आपकी पोस्ट का कंटेन्ट माना जाता है। इसलिए आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा की आपकी पोस्ट पर कोई भी कमेंट असंगत (Irrelevant) नहीं होना चाहिए । ब्लॉग कमेंट से एक फायदा यह है की आपकी पोस्ट गूगल की नज़रों में लंबी हो जाती है। और एक रिसर्च में पाया गया है की अधिक शब्दों वाली पोस्ट कम शब्दों वाली पोस्ट की तुलना में ज्यादा अच्छी रैंक करती हैं। साथ ही कमेंट के जरिए आप कीवर्ड कमेंटिग भी कर सकते हैं।

कीवर्ड कमेंटिंग का अर्थ है कि, जब कोई यूजर आप से ब्लॉग कमेंट के जरिए कुछ पूछता है तो आप उसका जवाब देते वक्त अपने जवाब में पोस्ट से संबंधित कीवर्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह कीवर्ड कमेंटिग कहलाता है। आपको यह काम जरूर करना चाहिए। यह ऑन पेज seo में काम आता है।

उदा. मान लीजिए आपने seo पर एक लेख लिखा जिसमें किसी यूजर ने लेख की तारीफ करते हुए कुछ कमेंट किया तो आप रिप्लाइ में “Thanks brother. Please keep visiting for more updates. I’ll try to share more best SEO tips
यह लिख सकते हैं और कमेंट में कीवर्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं जैसे मैंने उदाहरण में best seo tips लिख कर किया है।

गूगल के एक ऑफिसर ने ट्विटर पर बताया था की यदि आपकी वेबसाइट पर एक्टिव community है तो यह गूगल रैंकिग में सहायक हो सकती है।

लेख को अपडेट करते रहें (Keep Updating Article)

किसी भी विषय से संबंधित कोई नया पोस्ट लिखने से पहले यह जान लें की क्या आपने पहले से उस विषय पर कोई पोस्ट लिखा है ? यदि आपका जवाब हाँ है। तो आपको उस विषय से संबंधित नया पोस्ट लिखने की कोई जरूरत नहीं है। क्योंकि यह आपकी वेबसाइट को नुकसान कर सकता है। क्योंकि इससे गूगल भ्रमित हो सकता है कि किस पोस्ट को रैंक करूँ, पुरानी वाली पोस्ट को या नयी पोस्ट को। इससे अच्छा है नया पोस्ट लिखने के बजाय आप पुराने पोस्ट को अपडेट कर दें क्योंकि पोस्ट को लगातार अपडेट (Update) रखने से यह SEO में बहुत मदद करता है।

गूगल उन ब्लॉग को ज्यादा प्राथमिकता (Preference) देता है जो हमेशा अपडेट रहते हैं क्योंकि गूगल अपने यूजर को पुराना कंटेन्ट नहीं दिखाना चाहता है। इसलिए अपनी पोस्ट को लगातार अपडेट करते रहें।

कंटेंट को अपडेट ना रखने के मुख्य नुकसान हैं।

  1. कंटेन्ट पुराना होने की वजह से लोग वेबसाइट से वापिस लौट जाते हैं। जिस कारण आपकी वेबसाइट का बाउंस रेट बढ़ता है जो की आपकी वेबसाइट पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।
  2. लोग पुराने कंटेन्ट को पढ़ना पसंद नहीं करते हैं।
  3. आपकी ब्रांड को नुकसान पहुँता है।
  4. आपकी वेबसाइट का Dwell Time घटता है।

पोस्ट में क्या-क्या अपडेट करें ?

पोस्ट में क्या अपडेट करें यह पोस्ट के कंटेंट पर निर्भर करता है। यदि आपकी पोस्ट पूरी तरह से पुरानी हो चुकी है तो उस पुरानी पोस्ट को मिटा कर अच्छे से नयी पोस्ट लिखें ।
यदि पोस्ट का कुछ हिस्सा ही पुराना है तो केवल उस हिस्से को अपडेट कर दें यदि पुरानी इमेज हैं तो उन्हे भी अपडेट कर दें। पर यदि पोस्ट के कंटेंट में ज्यादा कुछ बदलाव नहीं आया है तो आप पोस्ट का टाइटल थोड़ा बदल दें जैसा मैंने नीचे उदाहरण में बताया है।

उदा. यदि आपने 2018 में “best on page seo in hindi – 2018” के संबंध में कोई पोस्ट लिखा है तो उसे अपडेट करके “best on page seo in hindi – 2019” कर दें और 2019 के अनुसार कंटेन्ट भी बदल लें ।

Brian dean (Backlinko के संस्थापक) द्वारा 1 मिलियन वेबसाइट का विश्लेषण किया गया जिसमें कुछ चौंकाने वाले परिणाम आए जिन्हें आप इस पोस्ट में जानेंगे।

वेबसाइट की स्पीड (Speed Of Website)

वेबसाइट की स्पीड, सर्च इंजन का बहुत बड़ा रैंकिंग फैक्टर है। इस बात का जिक्र गूगल ने अपने ब्लॉग में भी किया है। आपको पता होना चाहिए कि गूगल उन वेबसाइट को ज्यादा प्राथमिकता देता है जो जल्दी लोड (Load) हो जाती हैं। इसलिए वेबसाइट की स्पीड कैसे बढ़ाएं इसके लिए मैंने एक अलग से पोस्ट लिखा है। उसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

Speed of Website
Website Average Page Load Speed

छोटे URL का उपयोग करें ( Use Short URL)

Brain Dean ने विश्लेषण में पाया की छोटे URL अधिक प्रभावी होते हैं। तथा इन्हें गूगल पर रैंक करने में आसानी होती है।

LENGTH OF URL
LENGHT OF URL

Dwell Time

Dwell time क्या है ?
SERPs पर वापस लौटने से पहले किसी वेबसाइट पर बिताया गया समय Dwell Time कहलाता है।

उदाहरण– यदि कोई व्यक्ति गूगल पर कुछ सर्च करके किसी रिजल्ट (वेबसाइट) पर जाता है और उस वेबसाइट को देखकर वापस रिजल्ट पेज पर आता है, इस दौरान घटने वाले समय को Dwell Time कहा जाता है।
SEO Experts Dwell Time को रैंकिंग सिगनल मानते हैं। Dwell Time जितना अधिक हो उतना ही फ़ायदेमंद होता है। इसलिए कोशिश करें विजिटर आपकी वेबसाइट पर ज्यादा समय बिताए।

DWELL TIME GIF IMAGE TECH SAHAAYATA
DWELL TIME

इमेज / इंफोग्राफिक (IMAGES / INFOGRAPHICS)

मेरा आपसे छोटा सा सवाल है नीचे चित्र में दो पोस्ट दी गईं हैं पोस्ट (A), पोस्ट (B), दोनो एक ही विषय पर लिखीं गईं हैं तो मेरा सवाल है आप उन दोनों पोस्ट में से किस पोस्ट को पढ़ना पसंद करेंगे पोस्ट (A) या पोस्ट (B).

Post Template with image and without image
POSTS

मुझे आशा है आपका जवाब पोस्ट (B) रहा होगा, क्योंकि पोस्ट (B) दिखने में काफी सुंदर लग रही है क्योंकि उसमें इमेज को उपयोग किया गया है। पोस्ट में इमेज का उपयोग करने से पोस्ट आकर्षक लगने लगती है।

Sheffield University द्वारा किए गये एक अध्ययन (Study) में पाया गया की 94% लोग आपकी वेबसाइट की डिज़ाइन से आपके कंटेंट को आंकते (Judge) हैं। यदि आपकी वेबसाइट में बहुत सारा टेक्स्ट (Text) है तो ज्यादातर लोग आपके कंटेंट को पढ़ना पसंद नहीं करेंगे और यदि आपकी वेबसाइट में टेक्स्ट के साथ-साथ बहुत सारे विजुअल्स हैं जैसे- इमेज, चार्ट, इंफोग्राफिक्स, वीडियो, आदि तो ज्यादा संभावना है की लोग आपके कंटेंट को पढेंगे और आपकी वेबसाइट पर ज्यादा समय विताएंगे। इसलिए कम से कम अपनी पोस्ट में एक इमेज को जरूर शामिल करें।

Image performance with image (seo)
Social Media Views

[ जानकारी का स्रोत जानने के लिए यहाँ क्लिक करें ]

okdork.com के द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया की उन पोस्ट को 2.5 गुना अधिक शेयर किया जाता है जिनमें कम से कम एक इमेज या इंफोग्राफिक शामिल होता है। इसलिए इस बात को जरूर ध्यान रखें की आपको अपनी पोस्ट में कम से कम एक इमेज जरूर शामिल करनी है।

[ जानकारी का स्रोत जानने के लिए यहाँ क्लिक करें ]

पोस्ट की लंबाई (Length of posts)

पोस्ट की लंबाई के बारे में हर जगह अलग-अलग जानकारी दी गई है। कोई कहता है कि पोस्ट में कम से कम 1000 शब्द होने चाहिए, कोई कहता है 1500 शब्द होने चाहिए, तो कोई कहता है 2500 शब्द होने चाहिए। में सहमत हूँ कि अच्छे seo के लिए पोस्ट में लगभग 1500 शब्द या इससे अधिक होने चाहिए पर मेरा मानना यह भी है की पोस्ट में उतने ही शब्द होने चाहिए जितने जरूरी हों क्योंकि सभी को कम समय में मूल्यवान जानकारी चाहिए होती है। कोई भी लंबी पोस्ट को पढ़कर समय व्यर्थ नहीं करना चाहेगा। इसलिए पोस्ट उतनी ही लिखें जितनी जरूरी हो। पोस्ट को लंबा करने के लिए कुछ भी व्यर्थ का ना लिखें।

परंतु Brian dean ने अपने विश्लेषण में पाया की अधिक शब्दों वाली पोस्ट कम शब्दों वाली पोस्ट की तुलना में अच्छा प्रदर्शन करती है । उन्होने पोस्ट के लिए कम से कम 1900 शब्द लिखने का सुझाव दिया है।

length of Blog Post
Blog Post length

https का उपयोग करें (Switch to https)

आपने यह जरूर गौर किया होगा की जब भी आप गूगल पर कुछ सर्च करते हैं तो पहले पेज पर आने वाले ज्यादातर रिजल्ट https वाली वेबसाइट होती हैं। गूगल क्रोम भी जिन वेबसाइट पर ssl Certificate नहीं होता उन वेबसाइट पर चेतावनी (Warning) देता है।

तो SEO और यूजर के दृष्टिकोण से यह जरूरी हो जाता है की आपकी वेबसाइट पर ssl Certificate इनस्टॉल हो।
यदि आपकी वेबसाइट https आधारित नहीं है तो जल्द से जल्द आप ssl Certificate इनस्टॉल करें।

Use of https
Use Of https

ब्रोकन लिंक्स को ठीक करें (Fix Broken links)

Broken links वे लिंक्स होती हैं जो किसी पेज से लिंक हैं पर वह पेज अस्तित्व (Existence) में नहीं है। इन लिंक्स का पेज पर होने से विजिटर और SEO दोनो पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए इन्हें खोज कर किसी दूसरी लिंक से बदल दें।
उदाहरण– मान लीजिए आपने बहुत समय पहले अपनी पोस्ट में WWW.WEBSITE.COM/PAGE को लिंक किया था परंतु अब वह वेबसाइट मिट चुकी है। इस स्थिति में यदि आपका विजिटर उस लिंक पर क्लिक करता है तो 404 एरर आएगा, जो की आपके लिए एक ब्रोकन लिंक है।

ब्रोकन लिंक कैसे खोजें ?

ब्रोकन लिंक खोजने के लिए आप कुछ ऑनलाइन टूल और प्लग-इन का सहारा ले सकते हैं। जैसे- www.deadlinkchecker.com, https://www.drlinkcheck.com , वर्डप्रेस प्लग-इन Broken Link Checker आदि। ब्रोकन लिंक्स मिल जाने के बाद किसी दूसरी अच्छी लिंक्स से बदल दें।

आउटबाउंड लिंक्स (Outboud Links)

Outbound links वे Outgoing links होती हैं जो आपके डोमेन/वेबसाइट से किसी दूसरे डोमेन को पॉइंट कर रहीं होती हैं। आपने seo के संदर्भ इंटरनल लिंकिंग के बारे में तो जरूर सुना होगा परंतु क्या Outbound links भी seo में सहायता करती हैं ? SEO Experts मानना है हाँ, Outbound links भी On Page SEO में सहायक हो सकतीं हैं

link pointing to other Website
Outbound Link

UK की एक SEO एजेंसी द्वारा Outbound links पर एक प्रयोग किया गया। जिसमें उन्होंने 10 वेबसाइट बनाई और दसों वेबसाइट को एक ही कीवर्ड पर optimize किया गया वह कीवर्ड था “phylandocic” यह कीवर्ड पहले अस्तित्व में नहीं था यानी गूगल पर “phylandocic” सर्च करने पर कोई भी रिजल्ट प्रदर्शित नहीं होता था।

उन 10 वेबसाइट को एक ही तरह से डिज़ाइन किया गया था। उन दसों वेबसाइट में कोई भी अंतर नहीं था सिवाए एक बड़े अंतर के, और वह बड़ा अंतर था उन 10 वेबसाइटों में से 5 वेबसाइटों ने अच्छी वेबसाइटों को outbound link पॉइंट किया था।

जब कुछ दिन बाद गूगल पर “phylandocic” कीवर्ड सर्च किया तो एक चौकाने वाली बात सामने आई। उन 10 वेबसाइट में से जिन 5 वेबसाइटों ने outbound link दी थी वह क्रमशः उन वेबसाइट से ऊपर रैंक कर रहीं थी जिन वेबसाइट ने कोई outbound link नहीं दी थी।

Phylandocic Search Engine Result Page
Phylandocic SERPs

तो निष्कर्ष यह निकलता है की outbound links भी seo का हिस्सा हैं और outbound links रैंक करने में सहायक हो सकतीं हैं। इसलिए outbound links का जरूर ध्यान रखें।

बाउंस रेट (Bounce Rate)

बाउंस रेट का On Page SEO पर क्या प्रभाव पड़ता है इस विषय पर SEO Experts के बीच बाद-विवाद चलता रहता है। कुछ Experts मानते हैं बाउंस रेट On Page SEO को प्रभावित करता है तो कुछ मानते हैं इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

तो पहले हम जानते हैं की बाउंस रेट क्या होती है ?

बाउंस रेट उस प्रतिशत को कहते हैं जब एक session के दौरान एक ही पेज विजिट किया जाता है। या यह उन विजिट का प्रतिशत है जिसमें विजिटर केवल एक ही पेज विजिट करके वापिस रिजल्ट पेज पर लौट जाता है।

बाउंस रेट का फॉरमूला

Bounce Rate Formula
Bounce Rate Formula

बाउंस रेट तब उत्पन्न होती है जब कोई विजिटर आपकी वेबसाइट पर आए और बिना कोई और पेज विजिट करे वापिस रिजल्ट पेज पर लौट जाए (केवल एक ही पेज विजिट करे)।

क्या हमें बाउंस रेट से फर्क पड़ना चाहिए ?

Brian Dean द्वारा किए गये विश्लेषण में उन्होंने पाया की कम बाउंस रेट वाली वेबसाइट अधिक बाउंस रेट वाली वेबसाइट की तुलना में अच्छी रैंक करती हैं।

Bounce Rate And Google Position
Bounce Rate And Google Position

वेबसाइट की कितनी बाउंस रेट होनी चाहिए ?

वेबसाइट के लिए कितनी बाउंस रेट उचित है यह आपकी वेबसाइट पर निर्भर करता है परंतु आमतौर पर 30% से 40% तक बहुत बढ़िया मानी जाती है। 40 से 60 तक ठीक है ज्यादा चिंता की कोई बात नहीं है। 60 से 75 खास नहीं है परंतु खतरे से आप अभी भी बाहर हैं लेकिन सुधार किया जाना चाहिए। यदि आपकी बाउंस रेट 90 से ऊपर रहती है तब आपको जरूर इस पर ध्यान देना चाहिए और सुधार करना चाहिए।

तो यह था basic to Advance On Page SEO, आशा है आपको मेरा यह प्रयास जरूर पसंद आया होगा। यदि आपके मन में अभी भी कुछ सवाल हैं तो आप कमेंट के जरिए या हमारे अपने फेसबुक ग्रुप पर पूछ सकते हैं। मैं आपके प्रश्न का जवाब जरूर दूँगा।

संक्षिप्त पूर्वावलोकन / Quick Recap

On Page SEO के मुख्य बिन्दु

Top Level Domain
Name Of Website
Meta Tag
Keyword Research
Keyword Density
Title Of The Post
Image Alt Tag
Structure Of URL
Internal Linking
Anchor Text Of Links
Proper Formatting
Sitemap
Responsive Design
Blog Comments
Keep Updating Your Articles
Speed Of Website
Small URL
Dwell Time
Use Image / Infographics
Length of Post
Use https
Fix Broken links
Outbound links
Bounce Rate

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